कन्ट्रोल पद्धतियाँ एवं पावर इलेक्ट्रॉनिक्स ( CONTROL SYSTEM AND POWER ELECTRONICS )

औद्योगिक इलेक्ट्रॉनिकी का महत्व ( Scope of Industrial Electronics ) औद्योगिक इलेक्ट्रॉनिकी वह शाखा है जिसमें हम उन इलेक्ट्रॉनिक युक्तियों का अध्ययन करते हैं , जिनका उपयोग उन पद्धतियों या उपकरणों में किया जाता है जो कि विशेष रूप से उद्योगों में प्रयुक्त किये जाते हैं । इस प्रकार औद्योगिक इलेक्ट्रॉनिकी के अध्ययन में हम निम्न दो बातों का अध्ययन करते हैं । 1. अनेक अर्द्धचालक युक्तियों का अध्ययन । 2 , प्रयुक्त वैद्युत सर्किटों का अध्ययन ।

3. विशेष औद्योगिक इलेक्ट्रॉनिक पद्धतियों का अध्ययन । 11.2 . कन्ट्रोल पद्धति ( Control System ) मानव एक अति सुसज्जित तथा जटिल कन्ट्रोल पद्धति होती है । एक सामान्य मानव अनेक कार्य करने में समर्थ होतें है , जिनमें निर्णय करना भी शामिल है । इनमें से अनेक कार्य सामान्य कार्य होते हैं , जैसे एक स्थान से दूसरे स्थान को जाना , किसी वस्तु को उठाना आदि ।

किन्हीं विशिष्ट अवस्थाओं में इन कार्यों को अच्छी से अच्छी तरह से करना होता है उदाहरणार्थ 100 मीटर की दौड़ दौड़ने वाले धावक का ध्येय उस दूरी को कम से कम समय में तय करना होता है ।

इसके विपरीत मेराथन धावक का ध्येय निर्दिष्ट दूरी को न केवल शीघ्र से शीघ्र तय करना होता है अपितु ऐसा करने से धावक को ऊर्जा के उपभोग को भी कन्ट्रोल करना है जिससे सर्वश्रेष्ठ परिणाम प्राप्त किये जा सकें । इस प्रकार व्यावहारिक जीवन में अनेक उद्देश्यों को प्राप्त करना होता है तथा इन उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए कन्ट्रोल पद्धतियों का उपयोग किया जाता है ।

आधुनिक जीवन में कन्ट्रोल पद्धतियों का महत्व बढ़ता जा रहा है । व्यवहार में सभी दैनिक गतिविधियों के हर पहलू के साथ किसी न किसी प्रकार की कन्ट्रोल पद्धति सम्बन्धित होती है । उदाहरण के तौर पर घरों व दफ्तरों व कारखानों में तापन व वातानुकूलन के लिये ऑटोमैटिक कन्ट्रोल काम में लाया जाता है जिनके द्वारा आरामदायक जीवन के लिये घरों आदि का ताप व आर्द्रता को कन्ट्रोल किया जा सकता है । अधिकतम दक्षता ( efficiency ) प्राप्त करने के लिये अनेक दफ्तरों व कारखानों में आधुनिक तापन व वातानुकूलन पद्धतियों में कम्प्यूटर कन्ट्रोलों का उपयोग किया जाता है । इसी प्रकार वाशिंग मशीनों में ऑटोमेटिक समय कन्ट्रोल काम में लाया जाता है ।

उद्योगों में अनेक कन्ट्रोल पद्धतियाँ प्रयुक्त की जाती हैं , जैसे कि निर्मित वस्तुओं की गुणता ( quality ) का कन्ट्रोल , आटोमेटिक एसेम्बली लाइन , मशीन टूल कन्ट्रोल अन्तरिक्ष तकनीक तथा हथियार पद्धतियाँ , कम्प्यूटर कन्ट्रोल , संचार पद्धतियाँ , पावर पद्धतियाँ आदि । अन्वेषण कन्ट्रोल तथा सामाजिक एवं आर्थिक पद्धति कन्ट्रोल भी ऑटोमेटिक कन्ट्रोलों के सिद्धान्त द्वारा समझाये जा सकते हैं । सभी प्रकार की कन्ट्रोल पद्धति के निम्न तीन आवश्यक अंग होते हैं 1. कन्ट्रोल के उद्देश्य ( Objective of control ) ) 2. कन्ट्रोल पद्धति के घटक ( Components of control system ) 3. परिणाम ( Results ) कन्ट्रोल के इन मूल अंगों का सम्बन्ध ब्लॉक प्लॉन चित्र 1.1 ( a ) में दर्शाया गया है । कन्ट्रोल पद्धति के ब्लॉक प्लॉन के अनुसार उद्देश्यों को कन्ट्रोल पद्धति में फीड करने पर पद्धति परिणाम प्राप्त होते हैं ।

वैज्ञानिक दृष्टि से कन्ट्रोल पद्धति को फीड किये जाने वाले उद्देश्यों को इनपुट Input ) , कन्ट्रोल पद्धति को पद्धति के घटक ( system components ) तथा कन्ट्रोल पद्धति को चित्र 1.1 . ( b ) के अनुसार प्रदर्शित किया जा सकता है । पद्धति से प्राप्त परिणामों को आउटपुट ( output ) कहा जा सकता है । इस प्रकार कन्ट्रोलद्वारा इनपुट को सामान्यतः कन्ट्रोल पद्धति का उद्देश्य कन्ट्रोल पद्धति के घटकों फोड करके आउटपुट को किसी विशेष निर्धारित रूप में कन्ट्रोल करना होता है अर्थात् कन्ट्रोल पद्धति के घटकों को इनपुट फीड किया जाता है । कन्ट्रोल पद्धति के घटक उस इनपुट को कन्ट्रोल करके किसी वांछित रूप का आउटपुट प्रदान करती है । यह सारा कार्य systems ) कहते हैं ।

जब इलेक्ट्रॉनिक विधि से किया जाता है तो कन्ट्रोल पद्धति को फीड किये जाने वाला इनपुट एक्चयुऐटिंग सिगनल ( actuating signal ) कहलाता है तथा आउटपुट को नियन्त्रित चर ( Controlled variables ) कहते हैं । चित्र 1.1 में प्रदर्शित कन्ट्रोल पद्धति के सरल उदाहरण के रूप में किसी चौपहिये वाहन के स्टीयरिंग ( steering ) कन्ट्रोल पर विचार कीजिये । इस अवस्था में आगे के दोनों पहियों को नियन्त्रित चर या आउटपुट ( c ) माना जाता है , स्टीयरिंग पहिये की दिशा को एक्च्यूरेटिंग सिगनल या इनपुट ( u ) माना जाता है ।

इस अवस्था में कन्ट्रोल पद्धतियाँ कन्ट्रोल , प्रक्रिया स्टीयरिंग तकनीक तथा सम्पूर्ण वाहन की गति होती है । इसके विपरीत यदि वाहन की स्पीड को कन्ट्रोल करना होता है तो ऐक्सेलेरेटर पर लगाया गया दाब ऐक्च्यूरेटिंग सिगनल तथा वाहन की स्पीड कन्ट्रोल चर होता है । पूरे वाहन की कन्ट्रोल पद्धति में दो इनपुट ( स्टीयरिंग तथा ऐक्सेलरेटर ) तथा दो आउटपुट ( दिशा व स्पीड ) होते । इस अवस्था में दोनों कन्ट्रोल तथा आउटपुट एक – दूसरे पर निर्भर नहीं करते हैं ।परन्तु सामान्यतः अधिकतर कन्ट्रोल पद्धतियों में आउटपुटों का युग्मन किया होता है ।

एक अधिक इनपुट तथा एक आउटपुट वाली पद्धतियों को बहुलचर पद्धति ( multivariable $ 13. कन्ट्रोल पद्धतियों के प्रकार ( Kinds of control system ) एक कन्ट्रोल पद्धति भौतिक घटकों का एक ऐसा प्रबन्ध ( या व्यवस्था ) होती है जिसमें घटक इस प्रकार जुड़े ( या सम्बन्धित ) रहते हैं कि वे उसी पद्धति का या किसी अन्य पद्धति का कन्ट्रोल करते हैं । कन्ट्रोल पद्धतियाँ निम्न दो प्रकार की होती हैं 1. खुला लूप नियन्त्रण पद्धति ( open loop control system ) ) 2. बन्द लूप नियन्त्रण पद्धति ( closed loop control system ) 1.4 . खुला लूप नियन्त्रण पद्धति ( Open Loop Control System ) खूला लूप कन्ट्रोल पद्धति वह पद्धति होती है जिसमें नियन्त्रण क्रिया आउटपुट पर निर्भर नहीं करती है । खुला लूप नियन्त्रण पद्धति के तत्वों को दो भागों में विभक्त कर सकते हैं । इनमें से एक नियन्त्रक ( controller ) तथा दूसरा नियन्त्रित क्रिया होती है जैसा चित्र 1.2 की ब्लॉक प्लॉन में दिखाया गया है ।

इस प्लान के अनुसार इनपुट सिगनल या ( कमान्ड ) : को कन्ट्रोलर पर लगाया जाता है जिससे प्राप्त आउटपुट ऐक्च्प्यूटिंग सिगनल ॥ होता है । ऐक्च्यूऐटिंग सिंगनल तब नियन्त्रित प्रक्रिया को कन्ट्रोल करता है जिससे नियन्त्रित चर c किसी विशेष निर्धारित विधि से कार्य करता है । सरल अवस्थाओं में कन्ट्रोल पद्धति की प्रकृति के अनुसार नियन्त्रक एक प्रवर्धक यान्त्रिक लिन्क या कोई कन्ट्रोल युक्ति होती है । अत्याधिक इलेक्ट्रॉनिक कन्ट्रोलों में कन्ट्रोलर एक इलेक्ट्रॉनिक कम्प्यूटर भी होता है जैसा कि माइकोप्रोफेससर में होता है ।

A. खुला लूप कन्ट्रोल पद्धति के उदाहरण ( Examples of open loop System ) – खुला लूप पद्धति के प्रमुख उदाहरण निम्न हैं 1. ऑटोमेटिक टोस्टर ( Automatic Toaster ) – एक ऑटोमेटिक टोस्टर पर खुला लूप नियन्त्रक पद्धति होती है , क्योंकि इसका नियन्त्रण एक टाइमर द्वारा किया जाता है । एक अच्छा टोस्ट बनाने के लिए उपयोग कर्ता द्वारा समय आंकलित किया जाता है , जोकि नियन्त्रक का एक भाग नहीं होता है । इस नियन्त्रक पद्धति में टोस्ट गुणता आउटपुट होती है जबकि समय इनपुट होता है । 2. वाशिंग मशीन ( Washing Machine ) – ऑटोमेटिक वाशिंग मशीन को निम्न इनपुट राशियों में से किसी राशि या उनके संयोग के आंकलन द्वारा अंशाकित किया जाता है ।

( i ) डिटरजेन्ट की मात्रा , ( ii ) घुलने की मात्रा ( iii ) पानी की मात्रा ( iv ) पानी का ताप । कुछ मशीनों में इनमें से एक या एक से अधिक इनपुटों का निर्माण कर्ता द्वारा पूर्व निर्धारण कर दिया जाता है तथा शेष राशियों को आंकलन उपभोग कर्ता द्वारा पानी की कठोरता , डिटरजेन्ट की गुणता तथा धुलाई की मात्रा के अनुसार किया जाता है । इसके बाद वाशिंग समय को टाइमर पर सेट करके मशीन को ऊर्जा दी जाती है । चक्र को पूरा होने पर मशीन स्वतः ऑफ हो जाती है । यहाँ समय इनपुट तथा सफाई का प्रतिशत आउटपुट होती है । 3. विद्युत स्विच एक खुला लूप कन्ट्रोल पद्धति होती है ।

( Go ) के द्वारा नियन्त्रण करती है । 4. ट्रेफिक लाइट कन्ट्रोल भी एक खुला – लूप नियन्त्रण होती है जो कि एक निश्चित दिशा ( माना N – S ) में यातायात को आवागमन लाल लाइट ( Stop ) तथा ग्रीन लाइट इस प्रकार वे सभी कन्ट्रोल जिनमें समय का पूर्व निर्धारण किया जाता है । खुला लूप नियन्त्रण पद्धति होती है ।

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