विद्युत चुम्बकत्व ( Electro Magnetism )

परिचय ( Introduction ) यह बहुत दिनों से ज्ञात था कि प्रकृति में इस प्रकार का काला पत्थर प्राप्त होता है , जिसमें लोहे के छोटे – छोटे कणों को अपनी ओर आकर्षित करने की शक्ति होती है । इस प्रकार के पत्थर प्राय : एशिया – माइनर में मैगनीशिया के स्थान पर पाये जाते हैं । इसलिए मैगनीशिया के नाम पर वे पत्थर Magnet कहे जाने लगे ।

हमारे देश में इनको चुम्बक कहते हैं । प्रकृति में ( खानों में से ) पाये जाने वाले इस पत्थर को प्राकृतिक चुम्बक ( Natural magnet ) कहते हैं । इन पत्थरों के उस गुण को जिसके कारण वे लोहे के टुकड़ों को अपनी ओर खींचते हैं , चुम्बकत्व ( Magnetism ) कहते हैं ।

चीन में ईसा 2000 वर्ष पूर्व यह ज्ञात किया गया था कि यदि एक चुम्बक को बीच में डोरी बाँधकर इस रीति से लटकाया जाये कि वह स्वतन्त्रता से घूम सके तो उसका एक सिरा उत्तर की ओर तथा दक्षिण की ओर ठहरता है । इससे मल्लाहों को समुद्र पर दिशा ज्ञात करने में बड़ी सहायता मिली । आजकल जहाजों पर कुतुबनुमा दिशा ज्ञात करने के लिए काम में लाया जाता है । दिशा ज्ञात करने के काम देने के कारण इसको लोड स्टोन अर्थात् दिक्सूचक पत्थर भी कहते हैं ।

चुम्बकों के प्रारूप ( Types of Magnet ) | चुम्बक दो प्रकार की होती हैं ( i ) प्राकृतिक चुम्बक ( Natural Magnet ) – प्रकृति में जो चुम्बक पाए जाते हैं उनको प्राकृतिक चुम्बक कहते हैं । जैसे -चुम्बक पत्थर ( Magnet Stone ) । ( ii ) कृत्रिम चुम्बक ( Artificial Magnet ) – जिन चुम्बकों को चुम्बकीय – करण विधि ( magnetising method ) द्वारा बनाया जाता है ।

उन्हें कृत्रिम चुम्बक कहते हैं । फौलाद या लोहा भी कुछ रीतियों से चुम्बक बन जाता है । इस प्रकार बने चुम्बक को Artificial magnet कहते हैं । इस्पात या लोहे की छड़ों को चुम्बक पत्थर से रगड़ने से या इस्पात या लोहे की छड़ों या टुकड़ों के ऊपर कुण्डली कुण्डलित करके उसमें D.C. प्रवाहित करने पर कृत्रिम चुम्बक बनाए जाते हैं ।

कृत्रिम चुम्बक ( Artificial Magnet ) दो प्रकार की होती हैं ( a ) स्थायी चुम्बक ( Parmanent Magnet ) — वह पदार्थ , जो चुम्बक के समान गुण रखता है जैसे — इस्पात , को एक प्रबल शक्ति वाले चुम्बकीय क्षेत्र में रखा जाए तो प्रेरण ( Induction ) द्वारा वह चुम्बक बन जाता है ।

चुम्बकीय क्षेत्र से हटा लिए जाने पर वह चुम्बक की भाँति कार्य करने लगता है तथा वह गुण उसमें अधिक समय के लिए विद्यमान रहता है । इसलिए इसे ‘ स्थायी चुम्बक ‘ कहते हैं । स्थायी चुम्बक बनाने के लिए इस्पात , मैंगनीज , कोबाल्ट , निकिल , सिलिकन , स्टील तथा ऐलनीको इत्यादि उत्तम पदार्थ हैं । ( b ) अस्थायी चुम्बक ( Temporary Magnet ) – जब किसी चुम्बकीय पदार्थ को चुम्बकीय क्षेत्र में रखा जाता है तो वह चुम्बकीय गुण धारण कर लेता है ।

जब इस पदार्थ को चुम्बकीय क्षेत्र से हटा लिया जाता है तब उस पदार्थ का चुम्बकीय गुण समाप्त हो जाता है । उन्हें अस्थायी चुम्बक कहते हैं । 5.3 चुम्बक के गुण ( Properties of Magnet ) ( i ) चुम्बक लोहे को अपनी ओर आकर्षित करता है । ( ii ) स्वतन्त्रतापूर्वक लटका हुआ चुम्बक सदैव उत्तर – दक्षिण दिशा में ठहरता है ।

( iii ) दो चुम्बकों के विजातीय ध्रुवों में परस्पर आकर्षण तथा सजातीय ध्रुवों में प्रतिकर्षण ( repulsion ) होता है । ( iv ) चुम्बक चुम्बकीय पदार्थों में प्रेरण द्वारा चुम्बकत्व उत्पन्न कर देता है । ( v ) एक ही चुम्बक के दोनों ध्रुवों की सामर्थ्य समान होती 5.4 चुम्बकीय बल ( Magnetic Force ) एक चुम्बक द्वारा दूसरे चुम्बक पर लगाया जाने वाला “ आकर्षण या प्रतिकर्षण बल ” चुम्बकीय बल कहलाता है । इसे F प्रतीकात्मक अक्षर से व्यक्त करते हैं तथा इसका अन्तर्राष्ट्रीय मात्रक ‘ न्यूटन ‘ है । किसी बिन्दु पर चुम्बकीय बल की दिशा , बिन्दु से गुजरने वाली चुम्बकीय बल रेखा के उसी बिन्दु पर खींची गई स्पर्श रेखा की दिशा होती है । 5.5 चुम्बकीय क्षेत्र ( Magnetic Field ) | ( i ) किसी चुम्बक के चारों ओर वह क्षेत्र , जिसमें किसी बिन्दु पर स्थित स्वतंत्र चुम्बकीय सुई पर एक बलाघूर्ण आरोपित होता है जिसके कारण चुम्बकीय सुई एक निश्चित दिशा में ही आकर ठहरती है ।

चुम्बक के चारों ओर वह क्षेत्र , जिसमें स्थिर चुम्बकीय पदार्थ चुम्बकित हो जाता है , उस चुम्बक का चुम्बकीय क्षेत्र कहलाता है । अथवा किसी चुम्बक के चारों ओर वह क्षेत्र , जिसमें चुम्बकीय “ प्रभाव या बल ” का अनुभव होता है , उस चुम्बक का क्षेत्र या चुम्बकीय बल – क्षेत्र कहलाता है । चुम्बक के चारों ओर स्थित उसके चुम्बकीय बल को चुम्बकीय बल रेखाओं द्वारा प्रदर्शित किया जाता है । चुम्बकीय क्षेत्र में किसी बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा , बिन्दु से गुजरने वाली चुम्बकीय बल रेखा के उसी बिन्दु पर खींची गई स्पर्श रेखा की दिशा होती है । ( ii ) किसी

चुम्बकीय बल रेखायें ( Magnetic Lines of Force ) ) यदि एक चुम्बक की छड़ को एक चपटे पेपर ( flat paper ) पर रखा जाए तथा एक कम्पास सुई को चुम्बक के एक सिरे से दूसरे सिरे तक ले जाया जाए तो चुम्बकीय बल की स्थिति का पता लगाया जा सकता है । जैसाकि चित्र में दिखाया गया है । वास्तव में चुम्बकीय बल रेखायें वह मार्ग है जिस पर चुम्बकीय क्षेत्र में रखा हुआ एक प्रथक उत्तरी ध्रुव चलने लगता है , यदि उसे चलने की पूर्ण स्वतन्त्रता दी जाए ।

दूसरे शब्दों में , चुम्बकीय बल रेखा किसी चुम्बकीय क्षेत्र में खींचा गया वह चिकना वक्र है जिसके किसी बिन्दु पर खींची हुई स्पर्श – रेखा उस बिन्दु पर परिणामी बल की दिशा को प्रदर्शित करती है । चुम्बकीय बल रेखाओं में निम्नलिखित गुण होते हैं ( i ) यह सदैव उत्तरी ध्रुव से प्रारम्भ होकर दक्षिणी ध्रुव पर प्रवेश करती है । ( ii ) चुम्बकीय बल रेखायें एक दूसरे को नहीं काटती हैं । ( iii ) चुम्बकीय बल रेखायें लचकदार डोरियों की भाँति होती हैं तथा एक – दूसरे को विकर्षित करती हैं । ( iv ) यह बन्द वक्रों के रूप में होती है ।

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