उत्क्रम भंजन ( Reverse break down )

पिछले अनुच्छेद में हमने देखा की जब PN सन्धि उत्क्रम अभिनति में होती है तो उसमें अल्पसंख्यक वाहकों ( minority carrier ) की गति के कारण बहुत कम धारा प्रवाहित होती है जो आरोपित विभवान्तर पर निर्भर नहीं करती है । यदि उत्क्रम विभवान्तर का मान बहुत अधिक कर दें तो PN सन्धि में धारा एकदम बढ़ती है । वह वोल्टेज जिस पर यह घटना घटती है , उसे भंजन वोल्टेज ( Break down Voltage ) कहते हैं । इस वोल्टेज पर क्रिस्टल संरचना टूट जाती है । सामान्यतः इस स्थिति को आने नहीं देते हैं । उच्च उत्क्रम वोल्टेज को हटाने पर क्रिस्टल संरचना पुनः सामान्य हो जाती है किन्तु अधिक देर तक गर्म होने के कारण क्रिस्टल स्थाई रूप से नष्ट हो जाता है । भंजन की दो प्रक्रियायें हैं । ( i ) एवलान्च ब्रेक डाउन ( i ) जीनर ब्रेक डाउन ।

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